मिटाकर सारे विकार
संग्रहित किया साभार
फिर भी मौन ओढ़े रहे
अव्यक्त रहे सदा
कभी अभिव्यक्त न हो सके
द्वंद्व के तिमिर में
ढूंढते रहे तुम प्रकाश।।
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