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चुप्पी मेरी

                
                                                         
                            मैं समझता हूं, सब-कुछ
                                                                 
                            
परंतु! कहता कुछ भी नहीं
समस्या तुम्हारी यह हैं
तुम छिपा रहे हो, अधिक।।

चाहते हो इलाज सही हो
तो मन में रखों कुछ नहीं
यदि नही भी बताओगे
तो तुम्हें पढ़कर समझ लूंगा
मैं कारोबार समझने
समझाने का करता हूं।

झूठ बोलकर
संवेदनाओं को बटोरों नहीं
मैं बहता नही हूं
औरों की तरह
समझता हूं सब_ कुछ
पर कहता कुछ भी नहीं।।
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3 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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