युग युग से मैं चेतन हूं
बोध भावों का मैं कराता हूं
यदि अनभिज्ञ हो तो कहो
मैं नव चेतना से तुम्हें अभी परिचित करता हूं।।
युगधारा में बहते रहो
कर्मयोधा बन कर लड़ते रहो
जो लड़ा समय से नाम उसका अंकित हुआ युगपथ पर
उपेक्षा दिखलाई जिसने भी उपेक्षित हो गए वे युग से।।
नव चरण नव युग में चेतना को
अपरिहार्य होगा अपनाना सबको
जब तुम होगे गौण चेतना से
फिर राष्ट्र भी हो जाएगा मौन
साक्षी है इतिहास हमारा
हम चूके कहां ?
रण में कर्म पथ से
जब जब आसन्न हुआ राष्ट्र को खतरा
तब तब चैतन्य हो लड़े भारती के सुवीर तन मन से।।
युग युग से मैं चेतन हूं
बोध भावों का मैं कराता हूं
यदि अनभिज्ञ हो तो कहो
मैं नव चेतना से तुम्हें अभी
परिचित करता हूं।।
-मनोज सिन्हा
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