भूलते -भागते
और बिसरते
काल के क्षण
मधुर-मृदुल
स्मृतियों के पल
अंकित करते
अतीत के यादगार
खट्टे -मीठे
निमिष
बहते अविराम
समीर, हिमांश से
व्यक्त कर रहे
जीवन-सारांश
के कथ्य
अनमोल से
सारे के सारे
श्रेष्ठ-कृत्य
बनते-बुनते
चले गए
असंख्य वृत्य-विधान से
भूलते-भागते
काल -खंडों के
बिंब प्रतिमान
होते विस्मृत कहां
बल्कि! बस जाते उर में
बनकर अमित छाप से।।
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