हास -परिहास
में पाया
जीवन -धारा
का समग्र
उदासीनता में खोया
उमंग
उल्लास
नेह
स्नेह
क रंग
निश्छल भावों से आया
जीवन -धारा
के वृतों में
घूमता परिदृश्य
क्या धरा, क्या गगन
मिल एकाकार हुए
पुष्पित होता रहा
मन के गमलों में
विविध रंगों के कुसुम
विविध रंगों के कुसुम।।
- मनोज सिन्हा
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