श्रद्धा- विश्वास- आस्था
फूल- प्रसाद- रोड़ी- चंदन
अर्चना- प्रार्थना- नित्य वंदन
अर्पित है , मां दुर्गे
तेरे चरणों में
कर्म- वचन- विचार
भाव- समभाव -व्यवहार सभी
सुत्रित है,एक सूत्र में
जैसे माला और हार
समग्र कर्मों का समर्पण है
मां दुर्गे! तेरे चरणों में।।
जो कुछ मेरा है
गुण - अवगुण
दोष- सदोष
ज्ञान- प्राण
तन -मन
धन- वैभव
वह सब तुम्हारा है
समर्पित है, समग्र
मां तुम्हारे कर- कमलों में।।
बसता है , मेरा
निर्विकार मन
साकार देह
हृदय का अंश अंश
मां तेरे चरणों में।।
श्रद्धा विश्वास आस्था
फूल प्रसाद रोड़ी चंदन
अर्पित है , तेरे कर कमलों में।।
वह कल्पना क्या कल्पित
वह आकर क्या जो चित्रित
रंग सारे सब हैं तेरे
मेरा न कछु कोई
छाया हूं तेरा
प्रतिबिंब और प्रतिकृति भी हूं तुम्हारा ही
स्वीकार करो या अस्वीकार।।
श्रद्धा विश्वास आस्था
फूल प्रसाद रोड़ी चंदन
अर्चना प्रार्थना नित्य वंदन
न्योछावर है, मां दुर्गे तेरे चरणों में।।
-मनोज सिन्हा
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