अर्पित कर
समग्र समर्पण
आबद्ध कर स्वयं को
सारे नियमों से
समर्पित कर रहा हूं
तेरे चरणों में समस्त अर्घ्य
श्रद्धा, सुमन के सारे भाव
बिना फल-प्रतिफल
हे! देव देना अर्चन आशीष
हो जाए मंगल मंगल
जीवन का मार्ग निष्कंटक।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X