आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

अनंत की ओर

                
                                                         
                            आसमान है नीला क्यों
                                                                 
                            
बादल है, काला क्यों
सात तारें पंक्तिबद्ध है, क्यों
ध्रुव-तारा अटल है क्यों?

नियम तुमने बनाए
मकान भी, और संविधान भी
प्रकृति ने भी नियम बनाए
फिर यह प्रश्न है क्यों?

नभ बुलाता खगों को
उसे बैठाता वक्ष पर
विचरण कर अनंत-नील-पथ
खग लौट आते घर को।

अंबर देता प्रेरणा
नौ ग्रहों पर जाने को
उत्साह से बढ़कर मानव
जा पहुंचा चंद्रमा पर
लाल ग्रह भी दूर नहीं
आएगी सबकी बारी
समय के साथ बारी-बारी

जब विजेता होगा
नीला ग्रह
नौ ग्रहों पर
राहु-केतु-शनि

सब होंगें विजित-अधीन
फिर होगा संपूर्ण गगन
तुम्हारा! तुम भी विचरना
नभ के नील-पथ पर अनंत।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर