जब भी मिले
फूल दिल में खिले
जब भी बोले
शहद अमृत से झरे
तुम कोई और नहीं
मोगरे के बाग से
होकर आती हुई
महकती हवा हो
बहती रहो सदा
मोगरे, गुलाबों, जुही से होकर
आती रहो उन
सांसों की सौगात लेकर
शब्द नहीं है
तुझे कह सकूं धन्यवाद
सलामत रहो सदा
सलामत रहो।
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