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आकांक्षाएँ

                
                                                         
                            विह्वल आकांक्षाएँ
                                                                 
                            
प्रेम -सदन के हृदय पर
अंकित कर रही भाव
वैराग्य -वियोग के अनेक।।

उन्मत्त आकांक्षाएँ
प्रेम से सिक्त हृदय को
अर्पित कर रही स्नेह - गंगा
है, जो अदृश्य सी
परंतु स्पर्शित कर रही
मानों गुंजित हो रही मन में
मृदुल रागिणी के सप्त- धुन अनेक।।
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2 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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