विह्वल आकांक्षाएँ
प्रेम -सदन के हृदय पर
अंकित कर रही भाव
वैराग्य -वियोग के अनेक।।
उन्मत्त आकांक्षाएँ
प्रेम से सिक्त हृदय को
अर्पित कर रही स्नेह - गंगा
है, जो अदृश्य सी
परंतु स्पर्शित कर रही
मानों गुंजित हो रही मन में
मृदुल रागिणी के सप्त- धुन अनेक।।
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