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                            कुछ कहो ना
                                                                 
                            
सुनते भी नहीं
कुछ कहते भी नहीं
अक्सरहां
मौन ओढ़ लेते हो
तुम्हारी प्रतीक्षा में
कब से हूं, मैं अधीर
आलोकित क्यों नहीं होते?
प्रदिप्त किरण सा
हर दिन आती है, उषा
देने प्रकाश का सौगात
अब मान भी जाओ तुम
उतर कर आ जाओ
मेरे मन के आंगन में
मिटा जाओ द्वंदों के विकार
अब आ भी जाओ
अब आ भी जाओ!
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3 वर्ष पहले

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