यक़ीन मानो
जब तुम्हें कोई इज़हार करें
दिल दे बैठे,और प्यार करें
उम्मीद दिलाए साथ रहेंगे
तो क्या होगा?
यक़ीन मानो
रहे हमेशा हर पल यूँ ही
बात बात पर यूँ ही हँसाए
शाम ढले कभी बाहों तले
जमीं से आसमां तक नज़र आए
जो ना सोचें वो हो जाए
तो क्या होगा?
आँखों में छुपा के चेहरे कभी
यहाँ वहाँ तुम फिरते रहो
कोई पूछे नाम उसका
तो बताने में इतराते रहो
ज़रा विचार करो जां उसके लिए
ये पँख लगाकर उड़ जाए
तो क्या होगा?
जिसके लिए अपनो से डॉट सुनो
जिसके लिए लाखों सपने बुनो
जब वो ही अकेला सागर में
छोड़ के आए खुद साहिल तक
तब किसे अपना कहे सगा ?
-मनोज कुमार यकता
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