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रिश्तों की पूजा

                
                                                         
                            मेरे पांवों को कोई मखमल की आदत न हो जाए
                                                                 
                            
इसीलिए बुजुर्गों ने कंकर बिछाया है।

माँ मुस्कराती है और आंखें छलकती है,
मैं मान लेता हूँ कोई फरिश्ता आया है।

कच्चे धागों की हरेक वो रंगीन रेशे में,
भाई बहना के प्यार का अधिकार समाया है।

"समदिल" की होठों में हरदम मुस्कराहट हो,
सबकी होठों को तभी न्यौता भिजवाया है।

जिस घर में होती है सारे रिश्तों की पूजा,
मान लो उस घर में पूरा स्वर्ग समाया है।
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2 hours ago

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