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जहाँ में कुछ भी नहीं, ठुकराने के लिए!!

                
                                                         
                            जिन्हें फूल समझा, खुशबू पाने के लिए,
                                                                 
                            
वो कांटे ही दिए , दिल में चुभाने के लिए!

नींद खरीदी, नफरत के जालिम बाजार में,
सब कुछ गंवा दी, बस, कुछ पाने के लिए!

सूरज दिन में आकर ,चमकता ही रहा,
जुगनुएं आभारी रहे, रात के आने लिए!

कोई हमदम, कोई हमगम न रहा अब,
दिल में बचा नहीं राज, छिपाने के लिए!

दिल को सम्हाल कर रख ऐ "समदिल "
जहाँ में कुछ भी नहीं, ठुकराने के लिए!!
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3 घंटे पहले

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