महफिल महफिल मुस्कुराना तो पड़ता है...
यादों को तेरी आहिस्ता से भुलाना तो पड़ता है
इश्क में यार "अमन" इतना जुर्माना तो पड़ता है
क्या करें महफिल महफिल मुस्कराना तो पड़ता है
गम के दरिया में बह के जाना तो पड़ता है
साहिल पर पहुंचकर कश्ती को डुबाना तो पड़ता है
जीने के लिये खुद को पिलाना तो पड़ता है
पीने के बाद कदमों को डगमगाना तो पड़ता है
क्या करें महफिल महफिल मुस्कराना तो पड़ता है
गिर गिर के भी संभल जाना तो पड़ता है
भुलाकर भी तुमको दिल में बसाना तो पड़ता है
क्या करें महफिल महफिल मुस्कराना तो पड़ता है
- मनोज
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