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जिंदगी और वादे

                
                                                         
                            वादें करना इन्सान की फितरत होती है
                                                                 
                            
पर निभाना पता नहीं
वादें वो इनते शान से करते है
इतने विनम्र हो कर करते है
एक पल को लगता है
जिंदगी में जिंदगी मिल गई

जब निभाने का वक्त आता है
तो कौन जाने वादें किसने किया था
कब किया था कौन किया था कहां किया था
यकीन नहीं होता जनाब
पर ये जिंदगी है
यहां ये सब होती ही है
यकीन तो करना पड़ेगा
ऐसा सच में होता है
फिर भी यकीन नहीं होता है
इंतजार कीजिए सच में?
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3 वर्ष पहले

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