वादे करने वाले बहुत मिलते है
अपने भी वादे करते है
पराए भी वादे कराते है
पर निभाता कौन है
रब जाने
लेकिन दर्द बहुत होता है
जब कोई अपना कोई खास
जिसे आप बहुत मानते हो
वो वादे को तोड़ता है या भूलने का बहाना करता है
पराए से उतना दर्द नहीं होता
जितना कि अपनो से
वादा करो ही मत
जब निभा न सको
वादे करते हो तो
निभाना सीखो
फिर मत कहना
वादे तोड़ने के लिए होते है
ये जिंदगी है थोड़ा तो
गंभीर हो के जियो न।
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