तेरे इंतजार में बैठा हूँ छत पर
देख रहा हूँ इस नीले आसमान को
दिन से रात होने को चली तेरे इंतजार में
अरे अब अभी जाओ
कहीं मैं चला गया न
फिर देख लेना
मिलूंगा नहीं फिर मत कहना
मैं तो आई तुम नहीं आये।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X