खुले आसमान के नीचे मैं बैठा हूँ
हवाएं जोरों से चल रही है
पर मैं वहीं बैठा हूँ
मैं सोच रहा हूँ
हवाएं तो चल रही है अपने मगन में
पर मेरी जिदंगी क्यों रुकी हुई है
कोई तो बतलादो ऐसा क्यों?
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