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भरोसा जो किया है

                
                                                         
                            मालूम नहीं मुझको
                                                                 
                            
तुम कब आओगे
मालूम नहीं मुझको
तुम कब आओगे।
पर यकीन है मुझको
तुम एक न एक दिन ज़रूर आओगे।
भरोसा जो किया है तुमपे
इंतजार करूंगा मैं तुम्हारा
फैसला तुम्हे करना है
भरोसा तोड़ना है या बनाए रखना है।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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