अपनो से दूरी मैं सह नहीं पता हूं
दूरी का नाम सुनते ही मैं सहम सा जाता हूं
कब समझोगे तुम दूर होना तो दूर इसके खयालों से
मैं अंदर ही अंदर टूट जाता हूं
मैं तुम्हे अपना मानता हूं
क्या तुम मुझे अपना मानते हो
इसका ही मैं जवाब ढूंढता रहता हूं ?
हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X