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SAWIKAAR HAME
                
                                                         
                            आबाद करो या बर्बाद करो,
                                                                 
                            
तुम जो भी करो स्वीकार हमें ।

इस पार करो या उस पार करो ,
तुम जो भी करो स्वीकार हमें ।

मझदार लगाओ या डुबो दो मुझे ,
तुम जो भी करो स्वीकार हमें ।

तुम्हारी हु तुझ में मिलना हैं ,
तुम स्वीकार करो या तिरस्कार करो ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 वर्ष पहले

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