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कफ़न मे दफन हो गई हैं अब तलक

                
                                                         
                            कफ़न मे दफन हो गई हैं अब तलक..!
                                                                 
                            
जाने कितनी हीं तेरे-मेरे जैसी लाखों हस्तियां,
छोड़ इस दुनिया की सारी की सारी मगजमारियां।
कर लें कुछ-कुछ तू भी मस्तियां,
इस उजड़े जहां मे
एक उजड़ जायेंगी तेरी बसाई बस्तियां।
कफ़न मे दफन हो गई हैं अब तलक,
जाने कितनी हीं तेरे-मेरे जैसी हस्तियां।
 मंजू "मंजुला"
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 घंटे पहले

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