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कुछ सुलझे कुछ उलझे से

                
                                                         
                            कुछ सुलझे कुछ उलझे से
                                                                 
                            
लम्हे जीये कुछ अनजीए से
वक्त के हाथों से छिटक कर
ठहर से गए वो सभी लम्हे
यादों की सघन छाँव तले।
-मं शर्मा 
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एक घंटा पहले

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