नसीब से जन्मा था
तुझ से जुड़ा था
हवाओं ने तोड़ा है
तुझसे बिछोड़ा है
रिश्ता पुराना है
ऐसे कैसे तोड़ दूँ
पात तेरी डाल का
तेरे कदमों में पड़ा हूँ ।
-मं शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X