बहुत ऊँचा न उड़
अकेला हो जाएगा
अहंकार कम कर
वजूद मिट जाएगा
सीमाएं सीमित कर
वरना पछताएगा
वक्त रहते न समझा
प्रश्नचिन्ह बन जाएगा।
-मं शर्मा
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