पानी की बूँदें
सब मिलकर
फिर एक हो गईं
और बोलीं देखो
हम अब भी पानी हैं
तुम मनुष्य क्यों
मिलजुल नहीं पाते हो
बूँद का प्रश्न सुन
मैं शर्म से
पानी पानी हो गया हूँ।
- मं शर्मा (रज़ा)
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X