घड़ी घड़ी सवाल यही था
क्या कुसूरवार हरबार मैंही था
वक्त रहते संभला नहीं पर
क्या उम्र भर इंतज़ार सही था
लफ्जों में तो होड़ मची थी
कोई एकदूजे की सुनता नहीं था
हर बात का जवाब नहीं था
बे -वजह मलाल यही था ।
-मं शर्मा
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