वक्त फिर गुज़रता मिला
कल फिर मुँह चिढ़ाता दिखा
परेशां हुआ मैं भी वक्त से
कल वक्त से आगे निकल गया।
-मं शर्मा
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
कमेंट
कमेंट X