हर खत का
पहुँचना नहीं होता
हर पहुँचे खत का
पढ़ना नहीं होता
अहसासों की दरिया
गर सूखी नहीं होती
वक्त की कमी का
बहाना नहीं होता।
-मं शर्मा
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