मत कर माँ मोह तू इतना,
मत कल्पना के लगा पँख तू माँ,
मोह ममता तुझे अँधा कर देंगे,
कल्पना के पँख यह तेरे,
भला कब तक उड़ान भरेंगे,
टकरा कर हकीकत से,
एक दिन घायल जब होंगे,
फिर तू कितना तड़पेगी,
अपने जब तुझसे किनारा कर लेंगे,
तब तू कैसे जिएगी,
पहले ही सँभल जा ठोकर खाने से पहले,
मत कर माँ मोह तू इतना।
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