कोई लोभ नहीं इस बात का
कि बहुत लोग मरे किरदार को चाहे
मंन बस इतने में ही मान जाता है
बस चार लोग मानले
क्या ये आखिर कम है !
चार ही तो लोग होते है
ठठरी उठाने वाले
बाकी दर्शक होते है
महत्व उनका भी उतना होना चाहिए
जिनका जितना योगदान है
इस यात्रा में !
उन चारो के साथ
सर्वोत्तम सत्ता का साथ होतो
माटी डालो भीड़ को
भीड़ के सवालों को
भीड़ की तड़प को
भीड़ की धरना को !
भीड़ वो है जो
खुदकी आंखरी सांस तक
आपकी साँसों की गिनती करेगी
उन साँसों में नियंत्रण चाहेगी
जब तक बाकी है !
असल हमसफ़र आपका परमात्मा है
जिसे आप क्या ही देसकते हो
पर वो बड़ा दयालु है
छुपा हुआ हिम्मत देता है !
बस और कुछ कदम चल ले
चाहे ये आखरी परीक्षा न हो तेरी
हर परीक्षा में मैं खड़ा हु
तेरा सारथि बनकर
बस तू आस्था रखना
मेरे अस्तित्व पर
मेरी शक्ति पर !
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