स्त्री चरित्र, बड़ी जटिल है,
ज्ञानी खाये, मात,
बड़ी, कुशलता से, करे,
बड़े, से बड़ा, आघात!
चक्रव्यूःह है, काँटों का,
फूल नही, पारिजात!!
एक बार जो, फंस जावे,
निकस न पावे, हे! तात!
देव, मनुज की विद्या को,
सदा ही देती, मात!
जो जानन का दंभ भरे,
वो निकले, नवजात!!
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