मिसाल थी, नैतिकता की!
अनेकता मे, एकता की!
उत्कृष्ट मनीषियों से, भरी थी, पार्टी!
बात व्यौहार से सदस्य सारे, खाटी!
उच्च नैतिकता का स्तर था!
खादी मात्र, उनका वस्त्र था!
कल, छल से नही था, नाता!
यही बात, जनता को था, भाता!
जनता ने, फिर, सर आँखों पर बिठाया!
सत्ता के द्वार पर, सहर्ष, पहुचाया!
जिन मुद्दों पर, जनता का मत पाया!
उन्हे, बड़ी सहजता से, भुलाया!
हर रोज़, जनता को करते अब, हलाल!
बदल गये, अब इनके, चाल, ढाल!
भेड़ियों ने, छोड़ा, निरीह पशु का स्वांग!
सर चढ़ गयी, उनके, सत्ता का भांग!
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