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प्यार की सीमा

                
                                                         
                            घर के अंदर, बच्चे, पूर्णतया मां के होते हैं,
                                                                 
                            
मां के साथ खाते है, मां के साथ सोते हैं,
मां के सानिध्य में, नव जीवन के स्वप्न संजोते हैं,

घर की चारदीवारी से बाहर,
वही बच्चे बाप के हो जाते हैं,
पिता के कर्म,पद, प्रतिष्ठा,
उपनाम से जाने जाते हैं।

बाप की सीमा बाहर,
मां की सीमा घर,
दोनों की सीमा खत्म,
बच्चों के निकल गए जब, पर।।
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एक वर्ष पहले

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