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पराया, मत कर!

                
                                                         
                            अपनेपन की हद होती है, जाया मत कर,
                                                                 
                            
अपना ही, रहने दे, पराया मत कर!

कलेजा चीर के दिखाने की, जरूरत क्या है,
जलती है, वहाँ जो लौ मेरी, बुझाया मत कर!

करीब आने की, कवायद मे, बिछड़ जाते है, लोग,
दिल ए करीब है तेरे, ये जताया मत कर!

वक़्त आता है, जब, प्यार भी नागवार, गुजरे,
मै फरिश्ता नही हूँ, सर खाया, मत कर!

तेरे वजूद से कायम है, मेरी हस्ती,
मै भी कुछ हूँ, ये भरमाया मत कर!!
-मृदुल मनीष
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2 महीने पहले

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