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निश्चल प्रेम

                
                                                         
                            तोरे अंसुवन को, पीते पक्षी!
                                                                 
                            
मै ही नही, सृष्टि है, साक्षी!

इतना प्रेम, तु क्यूँ, करते हो!
हम पर इतना, क्यों, मरते हो!

प्यार तुम्हारा, निश्चल है, जल!
कर नही सकता, तुमसे, मै, छल!

लौट एक दिन मै, आऊंगा,
प्रेम, पताका, फहराउंगा!!

छोड़ नही सकता, कभी, तुमको!
स्पंदित हृदय के, अद्भुत, धुन को!

आज कसम, तुम्हरी खाता हुँ!
लौट अभी, मै, त्वरित आता, हूँ।।
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8 महीने पहले

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