चैन नहीं देता है, प्रभु! ये समय, काल का दंश!
मेरे तुम एक आराध्य, प्रभु! मै हु तुम्हारा,अंश!
अवचेतन में, तुम्ही समाए,
तुम बिन मुझे, कछु न भाए!
चेतन मन का तुम, अवलंबन,
जग का रहा, न कोई, बंधन!
भक्ति में दुनिया, बिसराई,
तुम्हे छोड़, हर चीज, पराई!
काग समान ये मन था, मेरा,
हो गया, पावन, हंस!
मेरे तुम एक आराध्य, प्रभु! मै हु, तुम्हारा, अंश।
तुम से ही, अस्तित्व है, मेरा!
जग तो बस, दो दिन का डेरा!
होना एक दिन, तुम में समाहित,
मृत्यु के हम, वंश!
मेरे तुम आराध्य, प्रभु! मै हूं तुम्हारा, अंश!!
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