लत, किसी भी चीज की हो, बुरी होती है!
जीवन और मृत्यु की, धुरी होती है!
सच ये भी है, बिना लत, ये जिंदगी, अधूरी होती है!
जूनून हो गर, लत का, तो तलवार, छुरी होती है!
दायरे से बाहर हो, लत, फिर, मजबूरी होती है!
लत से बर्बाद हो गयी, जाने, कितनी, जिंदगी!
लत, मगर, कहाँ, किसी की, पूरी होती है!
बुरी लतों को छोड़ने की, जद्दोहद मे,
रजामन्दी अपने दिल की भी, जरूरी होती है!
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