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अमिट दूरी

                
                                                         
                            पास रहें, पर मिटी न दूरी!
                                                                 
                            
मैं, इस धुरी, तु उस धुरी!

दुनिया वाले थे, दरमियाँ!
नज़र लग गयी, उनकी बुरी!

तुमने सुनी न, मेरी आँहे,
तेरी भी होगी, कुछ, मजबूरी!

अमिट रहेगा, हृदय पटल पर,
प्रीत तुम्हारी, श्रद्धा, सबूरि!

जटिल बड़े है, प्रीत के रस्ते,
चलना आना भी है, जरूरी!

आह! सफर तय हो न पाया,
प्रीत रह गयी, यूँ ही, अधूरी!!

मृदुल मनीष
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एक वर्ष पहले

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