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अकेला है

                
                                                         
                            आभूषण ले कर, भाग गयी, भार्या!
                                                                 
                            
दे दी, संबंध विक्षेद की अर्जी!

भरी जवानी मे, शादी शुदा इंसान, अकेला है!

चरित्र और संस्कारों के, पतन की अद्भुत ये बेला है!

प्रेम, मोह, का कोई नहीं, रिश्ता!
सब बंधु, धन दौलत का खेला है!

सबसे सुखी वही जन, मिलता!
जो स्वालंबी, अकेला है!

शादी शुदा जनों से पूछो, बतलायेगा!
क्या, क्या न उसने झेला है!

जिन के लिए, जीवन भर भागा!
उन्ही के लिए, अब वो ढेला है!

काल प्रभाव से निष्पादित, हर कर्म!
मनुष्य तो, समय का चेला है!

जीवन क्या! मिथ्या है, मानो!
अति सुंदर, स्मृतियों का, मेला है!
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6 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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