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                            जिसने भी दिया कतरा साथ हमारा ,,
                                                                 
                            
रही, जिंदगी तो पूरा समंदर लौटाएंगे...!!

जरूरत पडी, उसको, कभी हमारी!
हम, उसके लिए, जान पे, खेल, जाएंगे!

हमारी दोस्ती, मशहुर, है, ज़माने मे,
दोस्ती के लिए, अपना, वजूद भी, मिटाएंगे!

हम जो है, वो तुम हो; तुम जो हो, वो मै हूँ!
हम और तुम मिलके, एक नया जहाँ, बसायेंगे!

हम शायरों की तबियत, नाज़ुक मिजाज है!
करीब कभी आइये, आप भी, जान जाएंगे!
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
10 महीने पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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