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काश ऐसा होता अगर

                
                                                         
                            काश ऐसा होता अगर...!!
                                                                 
                            
काश ऐसा होता अगर,
कि बस कोड़े कागज पर लिखने भर से
कोई आ जाता,
तो जो खो गए हैं,
हम उनको भी वापस बुला पाते,
उनके साथ वो सारे
खुशनुमा वक्त बिता पाते,
उनके संग एक आशियाँ फिर सजा पाते,
काश ऐसा होता अगर...!!
फिर जो-जो खोया है हमने,
वो फिर से वापस पा लेते,
जो चले गए हैं कोसों दूर हमासे ,
दूसरी दुनिया में कहीं,
कोड़े पन्नों पर उनका नाम लिखकर
उन सबको फिर वापस बुला लेते,
काश ऐसा होता अगर...!!
कि बस सोचने या लिख देने से
हो जाता सब सही,
तो ये परेशानियाँ, दुःख, दर्द, पीड़ाएँ ही नहीं होतीं,
इस जहाँ में किसी को किसी से
कोई समस्याएँ नहीं होतीं,
फिर ना लड़ाइयाँ होतीं, ना कोई मरता यहाँ,
ना दुःख होता किसी को, ना दर्द से तड़पता कोई यहाँ,
बस प्यार और खुशियाँ आतीं,
शांति ही शांति होती,
काश ऐसा होता अगर...!!
कि बस कोड़े पन्ने पर लिख देने से
हो जाता सब सही,
काश ऐसा होता अगर...!!
-उर्वशी अमित मिश्रा
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2 घंटे पहले

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