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ख्वाहिश

                
                                                         
                            ख्वाहिश थी जिसे पाने की, मुद्दतों से
                                                                 
                            
वो मेरी आंखों की तमन्ना होकर रह गई।
कुछ इस तरह छोड़ी उन्होंने महोबब्त की छाप मेरी तकदीर के पन्नो पर
की मेरी किताब की कहानी कहीं बदल कर रह गई।
ये देख , कहीं दूर खड़ा एक शख्स मुझे कब से निहार रहा था
और वहीं दूर खड़े होकर मंद मंद मुस्कुरा रहा था।
शायद ये वो शख्स था, जो इस डूबते हुए को सहारा देना चाह रहा था।
पर में तो बस एक लेखक हूं,
जो अपने ही शब्दों में किसी पाना चाह रहा था।।
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2 वर्ष पहले

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