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आशा का गीत

                
                                                         
                            नभ गर्जन कितना ही कर्कश हो
                                                                 
                            
सब ओर कालिमा का घर हो,

दशों दिशाएँ ही क्यों न धूमिल हों
घनघोर अँधेरा छाया हो,
पीड़ा के गहरे बादल हों या फिर
दु:ख का काला साया हो,

हम साथ तुम्हारा न छोड़ेंगे!!
हम हाथ तुम्हारा न छोड़ेंगे!!


तूफानों की इस बस्ती में
झंझावात लाखों आएंगे,
डगमग कभी जो होंगे पग तो
थोड़ा सा सहारा तुम भी देना,
अंधियारा कितना ही हो राहों में
नन्हा सा दीप जलाए रखना,
जीते हैं समर असंख्य हमने
इस अदृश्य शत्रु से भी जीतेंगे,
जन्म-मृत्यु के इस रण में,
जीवन की आशा न छोड़ेंगे !

हम साथ तुम्हारा न छोड़ेंगे !
हम हाथ तुम्हारा न छोड़ेंगे !


है सत्य यही हर रोज सवेरा होता है
रात्रि का काला अंधियारा कब
सूरज के आगे टिकता है !!
रण में टिका सूरमा कब
पीछे फिर मुड़ता है!!
जीते हैं असंख्य समर हमने
इस अदृश्य शत्रु से भी जीतेंगे!
उम्मीदों का दामन हम न छोडेंगे!!

हम साथ तुम्हारा न छोड़ेंगे,
हम हाथ तुम्हारा न छोड़ेंगे!!
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2 वर्ष पहले

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