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धर्म अधर्म का विकल्प

                
                                                         
                            तटस्थ रहना कभी कोई विकल्प नहीं बन पाया था
                                                                 
                            
तटस्थ रहकर पितामह एवं द्रोणाचार्य ने अधर्म का साथ निभाया था

सही ग़लत,धर्म अधर्म का भेद सबको समझना होगा
हर धर्मयुद्ध में सबको अपना अपना विकल्प चुनना होगा
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11 महीने पहले

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