लखनऊ की हृदय विदारक घटना देख
दहशत में है कलम भी
सुख गई है कलम की स्याही
देखकर ऐसी तबाही
चलने का नाम नहीं ले रही
इसकी आत्मा भी झुलस गई है
कितना भी कोशिश करो उठती नहीं
वो मंजर आंखो से ओझल होती नहीं
वो खौफनाक,भयावह दृश्य देख
इसकी भी रूह कांप गई है
जो बेचैन रहती थी चलने के लिए
अब वही व्याकुल हो रो रही है।।
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