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तुम भी हो महान:......

                
                                                         
                            कांटों की इनायत पर गुलाब है
                                                                 
                            
फिर भी देखो कितना इतराता है

गुरूर है गुलाब को अपनी खुशबू पर
ये भी ख्याल नहीं मेहरबानी किसकी है

कांटे तो यूं ही बदनाम है
फूलों में भी चुभन कम नहीं

गुमान तो तुम्हें होगा ही गुलाब
सभी तुम्हारे ही दीवाने जो हैं

काश तुम कांटों के दर्द से वाकिफ होते
सहारा देकर भी कर्कश कहलाते हैं वो

दर्द उन्हें भी होता है अपने
अश्कों को छुपाते हैं वो

तुम्हें प्यार का प्रतीक मानते हैं लोग
उन्हें नफ़रत का प्रतीक बताते हैं लोग

तुम्हें खिलने वास्ते जीवन अपना खपाते हैं वो
पर उनके एहसानों को भूल जाते हैं लोग

तुम्हें पाकर इतराते हैं कठोर कह उन्हें तड़पाते हैं
वही सबके सपने सजाते हैं वही नफरत पाते हैं

कांटे तुम्हें दिल से सलाम, रखना अपना ध्यान
दुनिया की ये रिवायत है ओहदा देख देती सलाम

तुम्हारा नेक काम है सब जानते हैं इसलिए तुम भी करो खुद पर गुमान कभी मायूसी से मत
बताना अपनी पहचान, वास्तव में तुम्हारे ही
इनायत पर है खिला-खिला खूबसूरत गुलाब

गुलाब को ऊपर उठाने में तुम्हारा है योगदान
खुद को कठोर मत समझना तुम भी हो महान।।
-ममता तिवारी
 
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3 महीने पहले

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