सुनहरा एक गीत गाता चल
क्यों उदास है मुस्काता चल
लोगों के भी हौसले बढ़ाता चल
कुछ ना आता हो तो गुनगुनाता चल
सफर कट जाएगा आसानी से अपने तो अपने गैरों से भी हाथ मिलाता चल
सपना बुनता चल पल-पल आगे बढ़ता चल
गम को अलविदा कह
हंसी का स्वागत कर
संघर्ष सहर्ष स्वीकार कर
निर्भय निर्भीक होकर चल
पग पग राह मत बदल एक ही पथ पर अटल रह
सपना को साकार कर जीवन में प्रकाश भर
सुनहरा गीत गाता चल मुस्काता चल
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