चांद और तारे तो अपने वक्त पर निकलते है,
लेकिन हमारे अपने तो हर वक्त याद आते हैं।
यादों के दरिया में इस कदर डूब जाते है,
निकलने में सारे उम्र लग जाते है।
-ममता तिवारी
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